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Friday, May 7, 2010

पर semester से डरता हूँ मैं माँ ...


पी०जी०डी०सी०ए० सोसाइटी के सम्मानित सदस्य श्री कृष्ण कुमार जी यानी के०के० ने परीक्षाओं के बारे में अपनी अभिव्यक्ति हमें एक कविता के माध्यम से दी है। हम उनकी इस रचना के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए उसे यहां प्रकाशित कर रहे हैं-

मैं कभी बतलाता नहीं... पर semester से डरता हूँ मैं माँ ...|
यूं तो मैं दिखलाता नहीं ... grades की परवाह करता हूँ मैं माँ ..|
तुझे सब है पता ....है न माँ ||

किताबों में ...यूं न छोडो मुझे..
chapters के नाम भी न बतला पाऊँ माँ |
वह भी तो ...इतने सारे हैं....
याद भी अब तो आ न पाएं माँ ...|


क्या इतना गधा हूँ मैं माँ ..
क्या इतना गधा हूँ मैं माँ ..||

जब भी कभी ..invigilator मुझे ..
जो गौर से ..आँखों से घूरता है माँ ...
मेरी नज़र ..ढूंढे qstn paper...सोचूं यही ..
कोई सवाल तो बन जायेगा.....||

उनसे में ...यह कहता नहीं ..बगल वाले से टापता हूँ मैं माँ |
चेहरे पे ...आने देता नहीं...दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ ||


तुझे सब है पता .. है न माँ ..|
तुझे सब है पता ..है न माँ ..||

मैं कभी बतलाता नहीं... par semester से डरता हूँ मैं माँ ...|
यूं तो मैं दिखलाता नहीं ... grades की परवाह करता हूँ मैं माँ ..|

Tuesday, April 20, 2010

Admission Notice-2010-11(Allahabad University, MCA, BCA, PGDCA, DCA, O-Level)


CENTRE OF COMPUTER EDUCATION

Ph: 0532-2460383/ 2640192

Master of Computer Application (MCA)

Eligibility : Bachelor's Degree in any discipline.

Bachelor of Computer Application (BCA)

Eligibility : 10+2 with Mathematics as one of the subjects.

Entrance Test : 05 June 2010 Cost of form : Rs. 800/- by hand Rs. 900/- by post.

Post Graduate Diploma In Computer Application (PGDCA)

Eligibility : Bachelor's Degree in any discipline.

Entrance Test : 29th May 2010 Cost of form : Rs. 400/- by hand, Rs. 500/- by post.

DCA (DOEACC O-Level)

Eligibility : 10+2 for DCA

Entrance Test : 20 May 2010 Cost of from : Rs. 300/- hand Rs. 400/- by post

Thursday, January 21, 2010

PGDCA First Semester Examination, 2009-10, Computer Organization

D-4089
PGDCA First Semester Examination, 2009-10
Paper : First
Computer Organization
Time Allowed : Three Hours
Maximum Marks : 50

Note : Attempt Question 1 which is compulsory (carries 14 marks) and any other four questions(carries 9 marks each) from the rest. Five questions are to be answered in all.

1. (a) Define any four of the following : (4)
(i) Radix of a number system.
(ii) Word
(iii) Microprocessor
(iv) Multiplexer
(v) Cache bandwidth
(b) Convert the gray code 1101 to binary. (1)
(c) What is a parity bit in error detecting code? (1)
(d) Represent NAND gate as an inverter. (1)
(e) A line printer is capable of printing 132 characters on a single line, and each character is represented by 7-bit ASCII code. How many bits are required to print each line? (1)
(f) Explain the operation of JK flip flop. (1)
(g) State DeMorgan's theorem. (1)
(h) What is a counter? (1)
(i) Represent the following expression on K-map (2)
f=(A+B)(A'+B)(A'+B')
(j) What is the significance of virtual memory? (1)
2. (a) What is the concept of locality of reference? explain. (2)
(b) Differentiate between Spatial, Sequential and temporal locality of reference. (2)
(c) With the help of neat diagram explain how paging and segmentation is implemented. Also give the structure of map tables in both methods. (5)
3. (a) Distinguish between combinational and sequential circuits? Give examples of each. (2)
(b) Implement the following function (5)
F(a,b,c,d)=sigma M(1,3,5,6,8,9,11,12,13,15)
Using (i) Basic logic gates (ii) Using 1 of 8 MUX
(c) Give the logic implementation of 8X4 bit ROM using decoder of a suitable size.
4. (a) Write short note any three of the following :
(i) Assemble language programming
(ii) Flip Flops
(iii) Belady's Anomaly
(iv) Cache memory
(b) Differentiate between the following : (1.5+1.5)
(i) High order memory interleaving and Low order memory interleaving.
(ii) Half adder and full adder
5. (a) Why are computers memory system typically built as hierarchies. (2)
(b) If the address bus of a microprocessor is 16 bit wide what shall be the size of its memory map? (1)
(c) What is cache hit/miss? Give an expression for hit ratio. (4)
(d) What is PROM? Can a ROM device be considered as a combinational circuit. (2)
6. (a) Describe pipelining. (2)
(b) What is the difference between machine language and assembly language. (1)
(c) Write the characteristic table of a simple SR FF designed using NOR gates only. Derive its excitation table, characteristic equation and draw the corresponding State Diagram. (6)
7. (a) What is meant by State reduction? Which state of the Given states can be reduced? (3)
(b) Methodically design the following counter: (6)
-> 1-> 3 -> 5 -> 7 -> 9 -> 11 ->
8. (a) With the help of a neat block diagram explain how any computer functions. (4)
(b) Explain the addressing modes of an 8 bit microprocessor with examples. (5)


Friday, January 8, 2010

UPRTOU Allahabad Exam 2009 Problem Solving and Programming

UPRTOU Allahabad
Terminal Examination December 2009
Master in Computer Application (MCA)/ Post Graduate Diploma in Computer Application (PGDCA)
Course Title : Problem Solving and Programming
Course Code : MCA-1.2/PGDCA-1.2
Time : Three Hours Maximum Marks : 70
Note : Answer all questions. All question carry equal marks.
1. (a) What is computational Complexity? Describe the order of notation and rules for using the big-O notation.
(b) Distinguish between algorithm and flowchart. Describe the various symbols used for flowchart.
2. (a) Write an algorithm to find the factorial of any given integer number N and draw its flowchart.
(b) Describe the different types of datanames in C language.
3. Describe the various types of operators used in C Language with example.
4.(a) Discuss the statements used for input and output purpose in C Language with proper syntaxes and format specifications.
(b) Write a program in C language to find the simple interest for given amount rate and time.
5. Describe various loops (branch statements) in C language and write the program to find the sum of odd natural numbers from 1 to N where N is any integer number.
6. What is an array? Write a program to find the sum and average of N integer numbers using array. Where N is any integer number.
7. (a) What is function? Differentiate the function by using call by value and call by reference with suitable example.
(b) Write the short notes on following :
(i) Structure and union
(ii) Pointers
(iii) Types of data files in C Language
(iv) Recursion.

Wednesday, October 14, 2009

Judgement CIVIL APPEAL NO.6188 OF 2009

REPORTABLE

IN THE SUPREME COURT OF INDIA

CIVIL APPELLATE JURISDICTION

CIVIL APPEAL NO.6187 OF 2009

(Arising out of SLP (C) No.13913 of 2008)

ANIL CHANDRA & ORS. -------Appellants

VERSUS

RADHA KRISHNA GAUR & ORS. ------Respondents

WITH

CIVIL APPEAL NO.6188 OF 2009

(Arising out of SLP)No.14794 of 2008)

JUDGMENT

TARUN CHATERJEE, J.

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Wednesday, July 29, 2009

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir-2)

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir-2)

प्यारे दोस्तों,

जैसा कि हमने पिछली पोस्ट में वादा किया था कि जल्द ही हम उन वक्तव्यों को प्रकाशित करेंगे जो कि सोसाइटी के सदस्यों ने हमारा नजरिया कार्यक्रम के दौरान अपने गुरुजनों के प्रति व्यक्त की हैं। इन टिप्पणियों के प्रति हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये वक्तव्य या टिप्पणियां अपने गुरुजनों पर अपना पूर्ण अधिकार समझ कर छात्रों द्वारा लिखी गयी हैं। ये शिकायतें नहीं हैं न ही प्रशंसा हैं वरन ये मन के उद्गार हैं जिन्हें छात्र सामने उपस्थित होकर नहीं कह पाये उसे उन्होंने कागज पर उतारा। हमारी सोसाइटी वक्तव्य देने वाले सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करती है। कुछ वक्तव्य निम्नलिखित हैं -

१. "मैं अपनी क्लास की शुरुआत से ही काफी परेशान रहा हूं। क्लास में आने के पहले मैं काफी पाजिटिव था कि अभी तक जिस प्रकार मैं अपना परीक्षाफल लाता रहा हूं ठीक वैसा ही या और अच्छा करूंगा परन्तु याहं की क्लास में मुझे तनिक भी इन्टरेस्ट नहीं रहा। शायद इस बारे में मैं खुद भी कुछ अच्छी तरह अभी तक नहीं समझा पाया हूं कि ऐसा मेरे साथ क्यूं हुआ? कुछ अगर थोड़ा बहुत अच्छा लगा तो मनीष सर की क्लास तथा आशुतोष सर की क्लास। सच्चाई से कहूं तो इनका नजरिया पूरी क्लास के साथ आत्मीय रहा, फिर मैं क्यूं अपवाद रहता।"
२. "अध्यापक हमारे मार्गदर्शक होते हैं। यदि हमें पढ़ाई से सम्बन्धित कोई भी परेशानी हो तो अध्यापक से बेहिचक सलाह लेनी चाहिए।..... यहां कुछ अध्यापक बच्चों से सही ढंग से कम पेश आये।"
३. "सभी अच्छे हैं, पढ़ाते तो अच्छा हैं लेकिन समझाते बहुत कम हैं।"
४. "अत्यधिक लापरवाह"।
५. "कुछ अच्छे हैं पर समय नहीं देते"
६. "कुछ अध्यापक जैसे ........ जो कि सुशिक्षित होने के साथ सहयोगी स्वभाव के भी हैं जिससे कि हमें अतिरिक्त ज्ञान मिलता है जो कि प्रोफेशनल स्टूडेन्ट को नई उचाइयों पर ले जाता है। बाकी अध्यापक ........ जो कि स्टूडेन्ट को संतुष्ट नहीं कर पाते है जिसे छिपाने के लिए अपनी पर्सनालिटी और क्वालिफिकेशन का हौवा बनाते हैं"
७. "....... अत: अध्यापकों को चाहिए कि क्लास से पूर्व क्लास में क्या पढ़ाया जाना है इसको एक बार समराइज करके आएं और स्टूडेन्ट को अधिक से अधिक समझाने का प्रयास करें बजाय नोट्स छपाने के"
८. "सभी अध्यापक हमारी बड़ी फिक्र करते हैं कि हमारा क्या होगा। इसीलिए वे अपना १०० प्रतिशत देने में चूक जाते हैं। हम हर किसी को ये नहीं कह सकते कि वो ठीक से नहीं पढ़ाते क्योंकि उन्हें जो नहीं आता उसे वो पढ़ाते ही नहीं और हम शिकायत भी नहीं कर पाते.."
९. अध्यापक जो हमें कुछ सिखाना चाहें, जो अपने ज्ञान को बराबर से सभी में बांटना चाहें जो किसी भी समस्या में पूरा सहयोग दें। पर यहां पर ऐसे कुछ ही अध्यापक मिले जो विद्यार्थी के साथ पूरा सहयोग दिये"
१०. "कुछ एक अध्यापकों ने बहुत अच्छा ही दिशा निर्देश दिया और पढ़ाया परन्तु कुछ अध्यापकों ने पढ़ाने में कोई रुचि नहीं ली......."
११. "...... मेरा ये नजरिया है कि कोई भी अध्यापक अपने विद्यार्थी को अच्छा बनाने का प्रयास करते हैं। हमें करना अपने आप से ही सब कुछ है। सिर्फ अध्यापकों का एकमात्र सहयोग ही चाहिए जो शायद अपनी व्यस्तता के कारण हमें कम दे पाते हैं......"
१२. "कुछ टीचर तो अपना पूरा ज्ञान स्टूडेन्ट को देना चाहते हैं पर कुछ तो केवल बोर्ड पर ही टापिक लिखकर कोर्स खत्म करना चाहते हैं चाहे स्टूडेन्ट को समझ में आये या न आये"
१३. "छात्रों से चाहते हैं १०० प्रतिशत खुद कितने प्रतिशत हैं यह उनको पता नहीं"
१४. ".... सभी अध्यापक बहुत अच्छे हैं, ....... विद्यार्थियों को समझते हैं और उन्हें सही ज्ञान देते हैं। और उनके लिए कड़ी मेहनत करते हैं।"

Sunday, July 26, 2009

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir)

हमारा नजरिया

प्यारे साथियों,
शिक्षणेत्तर वर्ग के सबसे लोकप्रिय कर्मचारी की घोषणा के बाद अब वक्त है शिक्षक वर्ग से सबसे लोकप्रिय शिक्षक की घोषणा करने का। यहां हम आपको बताते चलें कि यह घोषणा सम्पादक की व्यक्तिगत राय नहीं है वरन सोसाइटी द्वारा एकत्र किये गये आंकड़ों का परिणाम है जिसे सोसाइटी ने अपने सदस्यों से
"हमारा नजरिया" कार्यक्रम के तहत एकत्र किया है।


गुरु कुम्हार सिख कुम्भ है, गढ़ि गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दे, बाहर वाहै चोट ।।


सच ही कहा गया है कि गुरु कुम्हार के समान और शिष्य मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होता है। एक सच्चे गुरु के लिए उसके शिष्य की भलाई ही सर्वोपरि होती है। अपने शिष्य की भलाई के लिए कभी कभी वह शिष्य पर चोट भी करता है डांटता फटकारता है, लेकिन केवल इसलिए कि उसमें कोई खोट न आने पाये। इस चोट के समय भी वह दूसरी ओर आन्तरिक तौर पर अपने शिष्य का मनोबल ही उचा करता है। जब हमारे गुरुजन हमारी किसी समस्या के समाधान में कहते हैं कि "जाओ फिर से करके देखो" तो उनका उद्देश्य केवल हमारे आत्मविश्वास को जगाना ही होता है। जिससे हम जीवन में किसी के आश्रित न रहें और समस्याओं का समाधान खुद ढूढ़ने का तरीका सीख सकें।

"हमारा नजरिया" के आंकड़ों में सबसे लोकप्रिय शिक्षक के रूप में जो नाम उभर कर आता है, वे हैं ..........
श्री मनीष कुमार चौरसिया सर, प्रवक्ता, सेन्टर आफ कम्प्यूटर एजूकेशन, इन्स्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद।

मनीष सर, एक ऐसा नाम, जो कि सदैव ही छात्रों के प्रति सजग रहे। मनीष सर सदैव छात्रों की गतिविधियों पर एक अभिभावक की तरह नजर रखते थे और जहां आवश्यकता पड़ती तुरन्त मार्गदर्शन करते। उनकी जिम्मेदारी न तो केवल उनकी कक्षा तक ही सीमित थी और न ही केवल उनके पढ़ाये जाने वाले विषय तक, वरन यदि उनके छात्र को कहीं भी किसी विषय पर परेशानी होती तो वे सदैव तत्पर रहते। वे एक जिम्मेंदार अभिभावक की तरह सदैव छात्रों पर नजर भी रखते हैं। यदि छात्र प्रयोगशाला में है और किसी तकनीकी खराबी के कारण प्रयोग नहीं कर पा रहा है तो वे तत्काल सम्बन्धित व्यक्ति को तकनीकी खराबी दूर करने के लिए स्वयं बुलाते और उसे ठीक कराते। यदि कक्षा या प्रयोग के समय कोई छात्र इधर-उधर विचरण करते हुए मिल जाता तो वे तुरन्त रुककर उससे इसका कारण पूंछते।

मनीष सर जटिल से जटिल विषय को भी इतना सरल बनाने की क्षमता रखते हैं कि छात्रों को लगता ही नहीं कि यह इतना आसान हा सकता है। सबसे बड़ी बात जो मनीष सर के अन्दर है वह यह कि वे छात्र के स्तर पर उतर कर उसकी भावनाओं को समझ कर और उसी भाषा में उसी भावों से शुरू करके, छात्र को अपने स्तर तक लाने की कला जानते हैं। वे जानते हैं कि यदि छात्र सबकुछ पहले से ही जानता तो वह यहां छात्र के रूप में क्यों आता।

मनीष सर का छात्रों के प्रति आत्मीयता का इससे बड़ा नमूना और क्या हो सकता है कि वे परीक्षा परिणामों को छात्र का मूल्यांकन नहीं मानते वरन वे इसे शिक्षक का मूल्यांकन मानते हैं। उन्हें छात्रों के मन में क्या चल रहा है इसका भली-भांति ज्ञान रहता है। वे एक कुशल मनोवैज्ञानिक की तरह छात्रों के मन में उठने वाली जिज्ञासा को पहले से ही भांप लेते हैं और उसके प्रश्न पूंछने से पहले ही उत्तर उसके सामने होता है।

मनीष सर की कक्षाओं में कभी-कभी कुछ छात्र विषय को ठीक से न समझ पाने के कारण कुछ अटपटे प्रश्न भी पूंछ लेते थे। यह मनीष सर की विद्वत्ता और सहृदयता ही है कि वे ऐसे अटपटे प्रश्नों पर कभी नाराज नहीं हुए, सरन ऐसे छात्रों को सदैव उत्साहित करते रहे जो कि अपेक्षाकृत कमजोर थे कि वे अपनी जिज्ञासाएं सामने लाएं और खुलकर प्रश्न पूंछें।

मनीष सर को भ्रमित छात्रों के भ्रम दूर करने का जादू आता है। जब कोई छात्र कुछ ऐसे प्रश्न करता जिससे उसका भ्रम झलकता तो वे तुरन्त उस छात्र के मानसिक स्तर पर उतर कर उसकी की बात को सही मानते हुए उससे बात करते हुए उसे आगे तक ले जाते। छात्र जैसे ही कुछ आगे पहुंचता उसे सब कुछ स्पष्ट हो जाता। इसी को कहते हैं कि गुरु ने ज्ञान का प्रकाश दिया।

हमारी सोसाइटी ने हमारा नजरिया कार्यक्रम के तहत छात्रों से जो उनके शिक्षकों के बारे में आंकड़े एकत्र किये हैं हम उन्हें यहां प्रकाशित करेंगे। लेकिन उसके लिए आपको कुछ दिनों की प्रतीक्षा करनी होगी। वे वक्तव्य हमारी अगली पोस्ट में उपलब्ध होंगे।

Saturday, July 25, 2009

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09

हमारा नजरिया- २००८-०९


प्यारे साथियों,
एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद आखिर आज समय आ ही गया "हमारा नजरिया" कार्यक्रम के तहत एकत्र किये गये आंकड़ों का खुलासा करने का। "हमारा नजरिया" कार्यक्रम के बारे में आप सभी जानते ही हैं फिर भी हम इसका छोटा सा परिचय देना चाहते हैं -
" यह कार्यक्रम पीजीडीसीए सोसाइटी की ओर से चलाया गया था जिसमें एक प्रपत्र पर पीजीडीसीए सोसाइटी के सभी सदस्यों से उनके द्वारा बिताये गये एक वर्ष के तजुर्बों को लिखने का अनुरोध किया गया था। इसमें सभी साथियों ने बढ़चढ़ कर पूरे उत्साह के साथ भाब लिया जिसके लिए सोसाइटी उनकी आभारी है।"

"हमारा नजरिया" के परिणामों की शुरूआत हम करते हैं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से। शिक्षणेत्तर कर्मचारी वे होते हैं जो कि हमारी कक्षा में आकर हमें शिक्षा प्रदान नहीं करते, वरन बाहर से ही हमारा पूरा सहयोग अपनी शिक्षणेत्तर गतिविधियों के माध्यम से करते हैं। शिक्षक वर्ग के अतिरिक्त समस्त स्टाफ इसी श्रेणी में आते हैं।

हमारा नजरिया कार्यक्रम से बटोरे गये आंकड़ों के अनुसार शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में सबसे लोकप्रिय रहे हैं .......... श्री धर्मेन्द्र सर, पुस्तकालयाध्यक्ष, सेन्टर आफ कम्प्यूटर एजूकेशन, इन्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद।

धमेन्द्र सर, एक ऐसा नाम जिसे लेते ही सदैव प्रसन्न रहने वाला एक चेहरा उभर कर सामने आता है। धर्मेन्द सर ने छात्रों के हृदय में जो यह स्थान बनाया है उसके पीछे उनका छात्रों के प्रति स्नेह, सहृदयता, उदारता का व्यवहार ही रहा है। इस बात से उन अध्यापकों को शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए जो कि यह सोचते हैं कि छात्रों को अनुशासन में रखने का एकमात्र साधन उन्हें डांटना-डपटना (भौकाल टाइट) करना ही है।

हमारे पुस्तकालय में लगभग काम की सभी पुस्तकें उपलब्ध हैं। व्यवस्था बड़ी ही अच्छी है और जरूरत के समय किताबें आसानी से उपलब्ध भी हो जाती हैं। इतने बड़े पुस्तकालय को अकेले धर्मेन्द्र सर ही सम्भालते हैं, यही उनकी काबिलियत की बेजोड़ मिसाल है। कभी-कभी धर्मेन्द्र सर भी अपने आपको भौकाली दिखाने का प्रयास करते थे, थोड़ा गुस्सा भी दिखाते थे, और थोड़ा सा डांटते भी थे, .... लेकिन यह सब बनावटी होता था और कुछ ही मिनट में उनका गुस्सा गायब हो जाता था और फिर वही प्रसन्न चेहरा आंखों के सामने होता था।

कई सदस्यों ने पुस्तकालय की प्रशंसा में यहां तक लिखा है कि "यदि ऐसा पुस्तकालय और पुस्तकें उपलब्ध कराने वाले धर्मेन्द्र सर न होते तो शायद हमारा पीजीडीसीए कर पाना लगभग असम्भव था।" सचमुच पीजीडीसीए करने वाले छात्रों के लिए पुस्तकालय उनके घर की तरह था। जिस प्रकार किसी छोटे बच्चे को अपने घर में अपनी मां की गोद में सबसे अधिक सुकून मिलता है उसी प्रकार पीजीडीसीए सोसाइटी के सदस्यों को लाइब्रेरी में पहुंचकर सुकून मिलता था। जब भी कोई छात्र किसी विषय टापिक को लेकर परेशान होता था या उसे किसी टापिक के बारे में सामग्री नहीं मिल रही होती थी तो वह अपनी समस्या धर्मेन्द्र सर से कहता। बस फिर क्या... धर्मेन्द्र सर तुरन्त उस समस्या के समाधान के रूप में कोई न कोई किताब पकड़ा देते। यह उनके किताबों, उनके विषय तथा तीक्ष्ण स्मरण शक्ति का ही परिचायक है।

शिकायत सुझाव : ऐसा नहीं है कि सभी सदस्यों ने पुस्तकालय एवं पुस्तकालयाध्यक्ष को सर्वोत्तम ही बताया हो कुछ सदस्यों ने इसकी कमियों को भी इंगित किया है जो इस प्रकार हैं-

१. पीजीडीसीए छात्रों को एक बार में एक ही पुस्तक घर ले जाने के लिए दी जाती है। छात्रों का सुझाव है कि कम से कम दो पुस्तकें घर ले जाने के लिए निर्गत की जानी चाहिए और यदि विभाग चाहे तो इसके लिए छात्र अतिरिक्त शुल्क देने को भी तैयार हैं।
२. पुस्तकों को गन्दी होने से बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाना जरूरी है। कई छात्र पढ़ते समय पुस्तकालय की किताबों में कुछ निशान लगाते चलते हैं या पुस्तकों पर कुछ लिख देते हैं। ऐसी पुस्तकों को जब दूसरा छात्र पढ़ता है तो बार-बार उसका ध्यान भंग होता रहता है।
३. कुछ छात्र पुस्तकें निर्गत कराके उनका फोटोस्टेट कराते हैं। अक्सर देखा गया हरूै कि मोटी किताबों का फोटोस्टेट कराने से उनकी बाइंडिंग खुल जाती है और पन्ने अलग-अलग हो जाते हैं। इस तरह पन्ने खोने और पुस्तक के अनुपयोगी हो जाने का भय बना रहता है। अत: जब छात्र पुस्तक वापस करें तो पुस्तक की सतर्क जांच अवश्य की जानी चाहिए और यदि कुछ कमी मिले तो यथोचित दण्ड का प्राविधान किया जाना चाहिए।
४. आज के समय में बहुत सी किताबें सपोर्टिंग सीडी के साथ आती हैं। पुस्तकालय में इन सीडी को रखने एवं अलग से निर्गत करने की व्यवस्था होनीच चाहिए। अक्सर किताबों के साथ सीडी संलग्न न होने से छात्रों को परेशानी होती है।
५. चूंकि अब एमसीए, पीजीडीसीए, बीसीए, डीआईटी आदि अनेक कोर्स संचालित होने से बैचों एवं छात्रों की संख्या बढ़ गयी है। अत: लाइब्रेरी में धर्मेन्द्र सर को कुछ सहयोगी स्टाफ उपलब्ध कराये जाने चाहिए जिससे कि हमारी लाइब्रेरी और बेहतर हो सके।
६. यदि लाइब्रेरी का कम्प्यूटरीकरण हो जाय तो क्या कहने....। इस कार्य में विभाग पर कोई अतिरिक्त व्ययभार नहीं आयेगा। विभाग के पास पर्याप्त कम्प्यूटनर हैं ही जहां तक लाइब्रेरी के साफ्टवेयर की बात है तो उसे तो यहां के छात्रों की टीम के द्वारा अध्यापकों के कुशल निर्देशन में प्रोजेक्ट के रूप में बनवाया जा सकता है। इस तरह के प्रयोग कई विश्वविद्यालयों मे ंकिये गये हैं और काफी सफल भी रहे हैं।

यहां हम अपने सार्थियों के वक्तव्य को प्रस्तुत कर रहे हैं जो उन्होंने अपनी लाइब्रेरी और लाइब्रेरियन के बारे में व्यक्त किये हैं। हमारे साथियों ने वक्तव्य नाम न छापने की शर्त पर ही दिये हैं इसलिए हम वक्तव्य के साथ नाम छापने में असमर्थ हैं -
१. "लाइब्रेरी में व्यवस्था अच्छी है और धर्मेन्द्र सर की बात ही अलग है।"
२. "लाइब्रेरी से ज्यादा लाइब्रेरियन मस्त हैं"
३. "एक विषय पर अधिकांशत: तीन या चार प्रकाशन की किताबें ही मौजूद हैं जो कि पर्याप्त नहीं है"
४. "काफी सहयोग मिला एवं पुस्तकें उपलब्ध"
५. "लगभग सभी आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध"
६. यहां की लाइब्रेरी में सारी किताबें उपलब्ध हैं लेकिन एक किताब ही एक समय पर घर ले जाने को मिल पाती है लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए, कम से कम दो पुस्तकें तो मिलनी ही चाहिए। हमारी लाइब्रेरी शोलगुल से परिपूर्ण होती है अन्य जगहों के पुस्तकालय की तुलना में"
६. "सबसे बढ़िया कुछ है तो हमारी लाइब्रेरी"
७. "पुस्तकालय अच्छा है सभी किताबें समय से मिल जाती है। बस कभी-कभी शोर करने पर धर्मेन्द्र सर से डांट भी पड़ जाती है"
८. "काफी अच्छा है, चूंकि मैंने लाइब्रेरी कार्ड नहीं बनवाया है इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कह सकती"
९. "पुस्तकालय यानि किताबों का संग्रह। हमारे यहां किताबों का संग्रह तो काफी है। यहां पढ़ने के लिए जरूरत भर की किताबें मिल जाती हैं। और अधिक पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता कि दूसरे किताब की तरफ ध्यान जाये....."
१०. "किताबें तो हैं पर उनकी सपोर्टेड सीडी नहीं है, कुछ किताबों के अच्छे संस्करण निर्गत नहीं होते हैं"
११. "पुस्तकालय में जितनी जरूरत की किताबें हैं मिल ही जाती हैं, धर्मेन्द्र सर मेहरबान हैं"
१२. "धर्मेन्द्र सर की उदारता, किताबों की सहायता, साथियों का अपनापन"
१३. "पुस्तकालय में किताबें तो उपलब्ध हैं लेकिन एक समय पर कई विद्यार्थियों को एक ही लेखक की किताबें नहीं मिल पातीं, किताबों की संख्या सीमित है"
१४. "पुस्तकालय तो अच्छी है, सभी पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं, पर मैने कभी कोई पुस्तक निर्गत नहीं करायी, क्योंकि मुझे मेरी दोस्तों से पुस्तकें मिल जाती हैं और ज्यादा पढ़ती भी कहां हूं। मेरी दोस्ते हैं न मुझे समझाने के लिए"
15. "Librarian is better than Library"
16. "Full of Books but none of my use"
17. "Very supportful for me and every time helped me."
18. "Unfortunately but sometimes i found number of books are less than the number of students."
19. "Only library teacher is good."
20. "I feel comfort. It was nice place to study and jokes too."

SYLLABUS : PAPER I : COMPUTER ARCHITECTURE AND ORGANIZATION

POST GRADUATE DIPLOMA IN COMPUTER APPLICATION

SEMESTER I

PAPER I : COMPUTER ARCHITECTURE AND ORGANIZATION

1. NUMBER SYSTEM : Binary, Decimal, Octal, Hexadecimal; Inter-conversion; Weighted & unweighted codes; Error Correction & detection; Error correcting codes; ASCII & EBCDIC codes.

2. BOOLEAN ARITHMETIC & THEOREM : Mathematical logic; Truth Tables; Logic variables & logic functions; Logic Expressions; Equivalent classes of logic functions; Boolean Algebra; Theorems of Boolean Algebrea; Switching Algebra & functions; Disjunctive & conjunctive canonical forms; Transformations between these forms; Simplification of Boolean functions.

3. LOGIC GATES & FAMILIES : AND, OR, NOT, NAND, NOR, Ex-OR, Ex-NOR; TTL, ECL, CMOS logic families

4. ANALYSIS OF COMBINATIONAL LOGIC CIRCUITS : ADDER, SUBTRACTOR, MULTIPLIER, MULTIPLEXER, DEMULTIPLEXER, DECODER, ENCODER, PARITY GENERATOR/ CHECHER, ETC.

5. Analysis of Sequential logic circuits : FLIP-FLOPS, REGISTERS, COUNTERS, SHIFT REGISTERS, etc.

6. MINIMIZATION TECHNIQUES : Karnough Map

7. Types of Computers : Basic building block of digital computer – Essential & Non-essential components; Types of Storage Elements – Static Memory, Dynamic Memory, EDORAM, SDRAM, NVRAM, DDRRAM, etc.

8. Basic Model of Stored Program Computer, Instruction sets : Reduced, Complex Addressing Schemes, Instruction, Execution mechanism, Organization of CPU, Memory organization, RAM, ROM, Cache Memory, Associative memory Organization, I/O devices with special reference to modern peripheral devices, Data Transfer Schemes; Hand shaking, polling, DMA. I/O Processors

9. Cache memory & its organization : Memory management techniques; Concept of virtual memory

10. Microprocessors : Essential & Non-essential components; Comparative study of 8-bit microprocessors, Concept of Assembly language programming.

Thursday, July 23, 2009

PGDCA Candidate(2008-09) batch Apply for Provisional Certificate

PGDCA Candidate(2008-09) batch Apply for Provisional Certificate

PGDCA SOCIETY के २००८-०९ बॆच के साथियो को सूचित किया जाता हॆ वे विभाग मे सम्पर्क कर के Provisional Certificate के लिये तत्काल Apply कर दे. जब तक Result नही आ जाता तब तक इस Provisional Certificate के आधार पर आगे की प्रक्रियाये(i.e. apply for job/admission) की जा सकती हॆ.
धन्यवाद

Sunday, July 5, 2009

जय-किशन|| JAY-KISHAN PART - 2(What is Binary Number System?)

2. BINARY NUMBER SYSTEM
[पानी पीने के बाद दोनों फिर इकट्ठे होते हैं और चर्चा का विषय है Binary Number System]
जय - देखो, मैंने Binary Number System की परिभाषा ढूढ़ ली है। B.Ram की किताब Fundamentals of Microprocessors and Microcomputers (4th Edition) के पेज ३० पर लिखा है कि "In the binary number system there are only two digits 0 and 1. The binary digits are called bits. The base of binary number system is 2." लेकिन इससे यह बात साफ नहीं होती कि जब कम्प्यूटर में केवल २ डिजिट 0 और 1 ही होते हैं तो हम हर तरह की जटिल से जटिल गणनाएं कैसे कर सकते हैं? अगर कम्प्यूटर 0 और 1 समझता है तो हम उसे 0 और 1 के बाद 2, 3, 4, ......क्यों नहीं समझा सकते? हजार तरह के नम्बर सिस्टम बनाने की क्या जरूरत है?

किशन - अरे... अरे....! तुमने तो प्रश्नों की झड़ी लगा दी। एक-एक प्रश्न पर विचार करते हैं। जो तुमने कहा कि कम्प्यूटर 0 और 1 समझता है, यह बात बिल्कुल गलत है। कम्प्यूटर एक मशीन है और उसमें उसकी खुद की समझ है ही नहीं। इसमें अत्यन्त सूक्ष्म एवं जटिल सर्किट होते हैं। उन सर्किटों में किसी खास समय में या तो धारा प्रवाहित हो रही होगी या नहीं हो रही होगी। जब धारा प्रवाहित होती रहती है तो हम उसे ON या HIGH बोलते हैं तथा जब धारा का प्रवाह बन्द होता है तब उसे हम OFF या LOW बोलते हैं। अब कल्पना करो किसी ऐसी सर्किट की जिसमें सैकड़ों INPUT और सैकड़ों OUTPUT हों। इस सर्किट की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए प्रत्येक INPUT और OUTPUT को ON/HIGH या OFF/LOW के रूप में व्यक्त करना काफी मुश्किल का काम होगा। इसी मुश्किल हो हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने ON/HIGH के लिए 1 और OFF/LOW के लिए 0 संकेत का प्रयोग करना शुरू किया जिससे सर्किट को समझना काफी सरल हो गया।
जय - ये बात तो समझ में आ गयी कि Binary number system में केवल दो डिजिट होते हैं 0 और 1 और इन्हें बिट कहते हैं तथा इस नम्बर सिस्टम का बेस 2 होता है। लेकिन ये तो बताओ कि किसी संख्या में किसी बिट का Weight कैसे पता करते हैं?
किशन - यह तो बहुत ही आसान है। किसी Binary number में उसके प्रत्येक बिट का Weight उसकी Position पर निर्भर करता है, जिसे हम निम्न फार्मूले की सहायता से पता कर सकते हैं-
The value of nth bit of the number from the right side = nth bit x 2 ^n-1 OR
= nth bit x (base)^n-1
जय - इसका मतलब तो यह हुआ कि इस फार्मूले का प्रयोग करके हम किसी भी बाइनरी नम्बर को Decimal number में बदल भी सकते हैं।
किशन-Exactly ............ किसी भी number system को Decimal number में बदलना बिल्कुल आसान है। इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं-
माना Binary number 10101 को Decimal number में बदलना है तो इसके लिए सबसे पहले हम Binary number की बिट पोजीशन पता करेंगे। यह बिट पोजीशन 1 से शुरू होता है तथा गणना दाहिने से बाएं ओर की जाती है।
Binary number 1 0 1 0 1
Bit Position 5 4 3 2 1
अब फार्मूला का प्रयोग करेंगे The value of nth bit of the number from the right side = nth bit x 2^ n-1
इस फार्मूले का प्रयोग करके हम हम बिट का Weight पता कर लेते हैं और फिर इन्हें आपस में जोड़कर Decimal number प्राप्त कर लेते हैं।
Binary number 1 0 1 0 1
Bit Position 5 4 3 2 1

Weight 1 x 2^4+ 0 x 2^3 + 1 x 2^2 + 0 x 2^1 + 1 x 2^0
16 + 0 + 4 + 0 +1
21 (Decimal)
इस विधि का प्रयोग करके हम किसी भी नम्बर सिस्टम का समतुल्य Decimal number प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रहे कि फार्मूला में बेस का मान नम्बर सिस्टम के अनुसार बदलता रहेगा। जैसे Octal number system का बेस 8 होता है, Hexa-Decimal number system का बेस 16 होता है।
जय - एक मिनट........! ये Octal और Hexa-decimal बीच में कहां से टपक पड़े? कुछ इनका परिचय भी तो मिलना चाहिए...
किशन - Octal और Hexa-decimal , ये दोनो भी कम्प्यूटर जगत में प्रयोग होने वाले अन्य महत्वपूर्ण नम्बर सिस्टम हैं। Octal Number system में 0 से 7 तक कुल 8 डिजिट होते हैं तथा इसका बेस 8 होता है। इसी प्रकार Hexa-Decimal number system में 0 से लेकर 15 तक कुल 16 डिजिट होते हैं तथा इसका बेस 16 होता है।
जय -
Octal Number system तो समझ में आ गया लेकिन तुमने अभी बताया कि Hexa-Decimal number system में 0 से 15 तक कुल 16 अंक होते हैं। ऐसे में अगर किसी ने 15 (Fifteen) लिखा है तो इसे हम 1 5 (One Five) भी तो पढ़ सकते हैं। इस स्थिति में 15 और 1 5 में अन्तर कैसे करते हैं।
किशन- जय तुमने बहुत अच्छा प्रश्न किया। इस समस्या के बचने के लिए ही
Hexa-Decimal number system में 9 के बाद की संख्याओं 10, 11, 12, 13, 14 एवं 15 को अभिव्यक्त करने के लिए एक खास तरीका अपनाया जाता है। यानि कि 10(ten) को A, 11 को B से, 12 को C से, 13 को D से, 14 को E से तथा 15 को F से अभिव्यक्त करते हैं।
जय - ये तो बड़ा ही अच्छा और आसान तरीका है। अब ये बताओ कि क्या Octal number और Hexa-decimal number से भी Decimal number प्राप्त किया जा सकता है?
किशन - क्यों नहीं........। इसके लिए भी वही फार्मूला प्रयोग किया जाता है जो Binary number से Decimal नम्बर प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त होता है। बस बेस का मान नम्बर सिस्टम के अनुसार बदलना होता है। सबसे पहले हम देखते हैं कि Octal number से Decimal number कैसे प्राप्त करते हैं-
Octal Number : 6 4 5
Bit Position: 3 2 1
Formula : Weight = nth bit x (base)^n-1
= 6 x 8^2 + 4 x 8^1 + 5 x 8^0
= 384 + 32 + 5
= 421 (Decimal)

इसी प्रकार Hexa-decimal number से Decimal number भी प्राप्त किया जा सकता है -
Hexa-Decimal Number : 5 A 9
Bit Position : 3 2 1
Formula : Weight = nth bit x (base)^n-1
= 5 x 16^2 + 10x 16^1 + 9 x 16^0
= 1280 + 160 + 9
= 1449 (Decimal)

जय - ये तो रही बात विभिन्न नम्बर सिस्टम से Decimal number प्राप्त करने की। ... पर क्या Decimal number से विभिन्न number system के समतुल्य संख्याएं प्राप्त की जा सकती है?
किशन - क्यों नहीं। हम decimal number से किसी भी number system का समतुल्य संख्या प्राप्त कर सकते है और यह बहुत ही आसन भी है। लेकिन आज के लिए इतना ही काफी है। इसके बारे में हम अगले दिन चर्चा करेंगे। अभी बहुत जोरों की भूख लगी है। घर चलते हैं।
[ दोनों अपने-अपने घरों को चले जाते हैं।]

Saturday, July 4, 2009

जय-किशन|| JAY-KISHAN PART - 1(What is Decimal Number System?)

जय-किशन
[यह कहानी है दो दोस्तों की- जय और किशन की। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त हैं। जय बचपन से ही शहर में रहा है, शहर में ही पला-बढ़ा है, उसका सारा काम-धाम शहरी अन्दाज में होता है। जबकि किशन ग्रामीण पृष्ठभूमि का है एवं एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता है। किशन ने बी०ए० में प्रवेश लेने से पहले कभी शहर का मुंह भी न देखा था। बी०ए० करने के बाद उसने पी०जी०डी०सी०ए० में प्रवेश लिया और यहीं पर उसकी मुलाकात जय से होती है और फिर दोनों पक्के दोस्त बन जाते हैं। दोनों ने यह नियम बना लिया है कि वे कक्षाएं समाप्त होने के बाद पढ़ाये गये विषय पर आपस में चर्चा करेंगे और यदि कोई समस्या आती है तो पहले आपसी विचार-विमर्श से, या फिर पुस्तकों की मददसे उसका समाधान करें और यदि फिर भी बात नहीं बनती, तो अगले दिन सम्बन्धित अध्यापक से सम्पर्क करेंगे।]

1- DECIMAL NUMBER SYSTEM
[जय सिर खुजलाते हुए बैठा है, लगता है कि किसी गहरी सोच में पड़ा है। तभी किशन वहां आता है]
किशन - अरे जय! ऐसे क्यों बैठे हो? क्लास खत्म होते ही बड़ी जल्दी यहां भाग आये.... क्या बात है?
जय - वात-वात कुछ नहीं........ आज पहली क्लास थी और पहले दिन ही गणित पढ़नी पड़ गयी। अगर मुझे पता होता कि पी०जी०डी०सी०ए० में गणित पढ़नी पड़ेगी तो मैं कभी प्रवेश न लेता। न जाने कहां फंस गया।
किशन - बस इतनी सी बात? मैं तो परेशान ही हो गया था कि कौन सा पहाड़ टूट पड़ा.....
जय - तुम्हें ये इतनी सी बात लगती है.......... अरे ये मेरे भविष्य का सवाल है मेरे भाई....
किशन - अच्छा....... तो चलो तुम्हारी इस समस्या का हल हम दोनों मिलकर निकालने की कोशिश करते हैं। चलो बताओ तुम्हें आज की क्लास में क्या समझ में नहीं आया?
जय - अरे ये पूंछो कि क्या समझ में आया? मालूम नहीं क्या पढ़ा रहे थे, मेरे तो सब सिर के उपर से लिकल गया, पता नहीं क्या जीरो, वन, जीरो, वन कर रहे थे।
किशन - अरे या टेंशन क्यों लेते हो? मै हूं न। चलो एक बार फिर कोशिश करते हैं। हम शुरूआत करते हैं Decimal Number System से।
जय - हॉं..... ये ठीक रहेगा। मेरे पास एक बुक भी है शायद उसमें से भी कुछ मदद मिल जाय।
किशन - Decimal Number System में ० से लेकर ९ तक कुल १० क्पहपज होते हैं और इस नम्बर सिस्टम का बेस १० होता है।
जय - यह नम्बर सिस्टम तो साधारणतया प्रयोग होने वाले नम्बर सिस्टम की तरह है जिसमें हम अपने दैनिक जीवन की आम गणनायें करते हैं।
किशन- की तरह नहीं ......... यह वही नम्बर सिस्टम है जिसमें हम अपनी रोजमर्रा की जरूरते पूरी करते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में जो भी संख्या प्रयोग करते हैं वह इन्हीं दस अंकों के संयोग से बना है अब चाहे वह हमारा रोल नम्बर हो, फोन नम्बर हो या मोबाइल नम्बर हो।
जय - [बात को बीच में ही काटते हुए] अरे ये सब तो ठीक है पर ...... इसका क्या मतलब कि इस नम्बर सिस्टम का बेस १० हेाता है?
किशन - इसका बड़ा ही आसान सा मतलब होता है। किसी भी अंक का दो मान होता है एक अंकित मान और दूसरा स्थानीय मान। मान लो एक संख्या है ४५९८। इस संख्या में ४ का स्थानीय मान है ४००० यानि की ४ x 10^3 इसी प्रकार ५ का स्थानीय मान ५०० या ५ x 10^2 है! हम संख्या ४५९८ को इस प्रकार भी लिख सकते हैं -
४५९८ = ४००० + ५०० + ९० + ८ या
४५९८ = ४ x 10^3 + ५ x 10^2 + ९ x 10^2 + ८ x 10^0
या अन्य शब्दों में हम कह सकते हैं कि दाहिनी तरफ से nवें अंक का मान = nवां अंक x 10^N-1 या n वां अंक x (base)^n-1
जय- अरे वाह..... ये तो बहुत ही आसान है। देखो मैं तुम्हें Decimal Number System के बारे में बताता हूं। इस नम्बर सिस्टम में ० से ९ तक कुल १० अंक होते हैं और इसका बेस १० होता है तथा आमतौर पर हम इसी नम्बर सिस्टम का प्रयोग करते हैं जैसे कि हमारा रोल नम्बर, फोन नम्बर, प्राप्तांक आदि।
किशन - अच्छा.. चलो अब हम Binary Number System को भी समझ लेते हैं।
जय- बिल्कुल नहीं.......... पहले हम Decimal Number System समझने की खुशी में पानी पीने चलेंगे।
[ और दोनों पानी पीने चले जाते हैं।]

Friday, July 3, 2009

हमारा नजरिया || HAMARA NAZARIYA

हमारा नजरिया || HAMARA NAZARIYA
पी०जी०डी०सी०ए० सोसाइटी ने अपनी सोसाइटी के २००८-०९ बैच के साथियों को उनके एक वर्ष सफलतापूर्वकव्यतीत करने पर बधाई दी है। साथ ही हमारी सोसाइटी ने हमारे सदस्यों के अनुभवों को आपस में साझा करने केउद्देश्य से एक सर्वेक्षण किया जिसके लिए एक प्रपत्र तैयार किया गया और सोसाइटी के सभी सदस्यों से उनके द्वारापी०जी०डी०सी०ए० करते हुए बिताये गये एक वर्ष का लेखा जोखा मांगा गया। इस प्रपत्र का प्रारूप इस प्रकार है।

बहुत जल्द ही हम अपने साथियों के विचारों के साथ आपके सामने उपस्थित होंगे। जिसमें हमारे साथियों के द्वारा पी०जी०डी०सी०ए० करते हुए बिताये गये पलों के रोचक अनुभव जो कि हमारे अध्यापकों, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, वार्षिकोत्सव, प्रोजेक्ट सहित अनेक विषयों से सम्बन्धित है की रोचक प्रस्तुति होगी।

Tuesday, June 23, 2009

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