|| NOTICE BOARD ||

* * * THIS BLOG CAN BE BEST VIEWED ON GOOGLE CHROME * * * Quitters never win Winners never quit * * *

Sunday, July 26, 2009

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir)

हमारा नजरिया

प्यारे साथियों,
शिक्षणेत्तर वर्ग के सबसे लोकप्रिय कर्मचारी की घोषणा के बाद अब वक्त है शिक्षक वर्ग से सबसे लोकप्रिय शिक्षक की घोषणा करने का। यहां हम आपको बताते चलें कि यह घोषणा सम्पादक की व्यक्तिगत राय नहीं है वरन सोसाइटी द्वारा एकत्र किये गये आंकड़ों का परिणाम है जिसे सोसाइटी ने अपने सदस्यों से
"हमारा नजरिया" कार्यक्रम के तहत एकत्र किया है।


गुरु कुम्हार सिख कुम्भ है, गढ़ि गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दे, बाहर वाहै चोट ।।


सच ही कहा गया है कि गुरु कुम्हार के समान और शिष्य मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होता है। एक सच्चे गुरु के लिए उसके शिष्य की भलाई ही सर्वोपरि होती है। अपने शिष्य की भलाई के लिए कभी कभी वह शिष्य पर चोट भी करता है डांटता फटकारता है, लेकिन केवल इसलिए कि उसमें कोई खोट न आने पाये। इस चोट के समय भी वह दूसरी ओर आन्तरिक तौर पर अपने शिष्य का मनोबल ही उचा करता है। जब हमारे गुरुजन हमारी किसी समस्या के समाधान में कहते हैं कि "जाओ फिर से करके देखो" तो उनका उद्देश्य केवल हमारे आत्मविश्वास को जगाना ही होता है। जिससे हम जीवन में किसी के आश्रित न रहें और समस्याओं का समाधान खुद ढूढ़ने का तरीका सीख सकें।

"हमारा नजरिया" के आंकड़ों में सबसे लोकप्रिय शिक्षक के रूप में जो नाम उभर कर आता है, वे हैं ..........
श्री मनीष कुमार चौरसिया सर, प्रवक्ता, सेन्टर आफ कम्प्यूटर एजूकेशन, इन्स्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद।

मनीष सर, एक ऐसा नाम, जो कि सदैव ही छात्रों के प्रति सजग रहे। मनीष सर सदैव छात्रों की गतिविधियों पर एक अभिभावक की तरह नजर रखते थे और जहां आवश्यकता पड़ती तुरन्त मार्गदर्शन करते। उनकी जिम्मेदारी न तो केवल उनकी कक्षा तक ही सीमित थी और न ही केवल उनके पढ़ाये जाने वाले विषय तक, वरन यदि उनके छात्र को कहीं भी किसी विषय पर परेशानी होती तो वे सदैव तत्पर रहते। वे एक जिम्मेंदार अभिभावक की तरह सदैव छात्रों पर नजर भी रखते हैं। यदि छात्र प्रयोगशाला में है और किसी तकनीकी खराबी के कारण प्रयोग नहीं कर पा रहा है तो वे तत्काल सम्बन्धित व्यक्ति को तकनीकी खराबी दूर करने के लिए स्वयं बुलाते और उसे ठीक कराते। यदि कक्षा या प्रयोग के समय कोई छात्र इधर-उधर विचरण करते हुए मिल जाता तो वे तुरन्त रुककर उससे इसका कारण पूंछते।

मनीष सर जटिल से जटिल विषय को भी इतना सरल बनाने की क्षमता रखते हैं कि छात्रों को लगता ही नहीं कि यह इतना आसान हा सकता है। सबसे बड़ी बात जो मनीष सर के अन्दर है वह यह कि वे छात्र के स्तर पर उतर कर उसकी भावनाओं को समझ कर और उसी भाषा में उसी भावों से शुरू करके, छात्र को अपने स्तर तक लाने की कला जानते हैं। वे जानते हैं कि यदि छात्र सबकुछ पहले से ही जानता तो वह यहां छात्र के रूप में क्यों आता।

मनीष सर का छात्रों के प्रति आत्मीयता का इससे बड़ा नमूना और क्या हो सकता है कि वे परीक्षा परिणामों को छात्र का मूल्यांकन नहीं मानते वरन वे इसे शिक्षक का मूल्यांकन मानते हैं। उन्हें छात्रों के मन में क्या चल रहा है इसका भली-भांति ज्ञान रहता है। वे एक कुशल मनोवैज्ञानिक की तरह छात्रों के मन में उठने वाली जिज्ञासा को पहले से ही भांप लेते हैं और उसके प्रश्न पूंछने से पहले ही उत्तर उसके सामने होता है।

मनीष सर की कक्षाओं में कभी-कभी कुछ छात्र विषय को ठीक से न समझ पाने के कारण कुछ अटपटे प्रश्न भी पूंछ लेते थे। यह मनीष सर की विद्वत्ता और सहृदयता ही है कि वे ऐसे अटपटे प्रश्नों पर कभी नाराज नहीं हुए, सरन ऐसे छात्रों को सदैव उत्साहित करते रहे जो कि अपेक्षाकृत कमजोर थे कि वे अपनी जिज्ञासाएं सामने लाएं और खुलकर प्रश्न पूंछें।

मनीष सर को भ्रमित छात्रों के भ्रम दूर करने का जादू आता है। जब कोई छात्र कुछ ऐसे प्रश्न करता जिससे उसका भ्रम झलकता तो वे तुरन्त उस छात्र के मानसिक स्तर पर उतर कर उसकी की बात को सही मानते हुए उससे बात करते हुए उसे आगे तक ले जाते। छात्र जैसे ही कुछ आगे पहुंचता उसे सब कुछ स्पष्ट हो जाता। इसी को कहते हैं कि गुरु ने ज्ञान का प्रकाश दिया।

हमारी सोसाइटी ने हमारा नजरिया कार्यक्रम के तहत छात्रों से जो उनके शिक्षकों के बारे में आंकड़े एकत्र किये हैं हम उन्हें यहां प्रकाशित करेंगे। लेकिन उसके लिए आपको कुछ दिनों की प्रतीक्षा करनी होगी। वे वक्तव्य हमारी अगली पोस्ट में उपलब्ध होंगे।

0 Comments:

इस ब्लाग की सामग्री को यथाशुद्ध प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है फिर भी किसी भी त्रुटि के लिए प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा