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Wednesday, July 29, 2009

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir-2)

हमारा नजरिया- २००८-०९|| HAMARA NAZARIYA 2008-09 (Best Teacher-MKC Sir-2)

प्यारे दोस्तों,

जैसा कि हमने पिछली पोस्ट में वादा किया था कि जल्द ही हम उन वक्तव्यों को प्रकाशित करेंगे जो कि सोसाइटी के सदस्यों ने हमारा नजरिया कार्यक्रम के दौरान अपने गुरुजनों के प्रति व्यक्त की हैं। इन टिप्पणियों के प्रति हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये वक्तव्य या टिप्पणियां अपने गुरुजनों पर अपना पूर्ण अधिकार समझ कर छात्रों द्वारा लिखी गयी हैं। ये शिकायतें नहीं हैं न ही प्रशंसा हैं वरन ये मन के उद्गार हैं जिन्हें छात्र सामने उपस्थित होकर नहीं कह पाये उसे उन्होंने कागज पर उतारा। हमारी सोसाइटी वक्तव्य देने वाले सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करती है। कुछ वक्तव्य निम्नलिखित हैं -

१. "मैं अपनी क्लास की शुरुआत से ही काफी परेशान रहा हूं। क्लास में आने के पहले मैं काफी पाजिटिव था कि अभी तक जिस प्रकार मैं अपना परीक्षाफल लाता रहा हूं ठीक वैसा ही या और अच्छा करूंगा परन्तु याहं की क्लास में मुझे तनिक भी इन्टरेस्ट नहीं रहा। शायद इस बारे में मैं खुद भी कुछ अच्छी तरह अभी तक नहीं समझा पाया हूं कि ऐसा मेरे साथ क्यूं हुआ? कुछ अगर थोड़ा बहुत अच्छा लगा तो मनीष सर की क्लास तथा आशुतोष सर की क्लास। सच्चाई से कहूं तो इनका नजरिया पूरी क्लास के साथ आत्मीय रहा, फिर मैं क्यूं अपवाद रहता।"
२. "अध्यापक हमारे मार्गदर्शक होते हैं। यदि हमें पढ़ाई से सम्बन्धित कोई भी परेशानी हो तो अध्यापक से बेहिचक सलाह लेनी चाहिए।..... यहां कुछ अध्यापक बच्चों से सही ढंग से कम पेश आये।"
३. "सभी अच्छे हैं, पढ़ाते तो अच्छा हैं लेकिन समझाते बहुत कम हैं।"
४. "अत्यधिक लापरवाह"।
५. "कुछ अच्छे हैं पर समय नहीं देते"
६. "कुछ अध्यापक जैसे ........ जो कि सुशिक्षित होने के साथ सहयोगी स्वभाव के भी हैं जिससे कि हमें अतिरिक्त ज्ञान मिलता है जो कि प्रोफेशनल स्टूडेन्ट को नई उचाइयों पर ले जाता है। बाकी अध्यापक ........ जो कि स्टूडेन्ट को संतुष्ट नहीं कर पाते है जिसे छिपाने के लिए अपनी पर्सनालिटी और क्वालिफिकेशन का हौवा बनाते हैं"
७. "....... अत: अध्यापकों को चाहिए कि क्लास से पूर्व क्लास में क्या पढ़ाया जाना है इसको एक बार समराइज करके आएं और स्टूडेन्ट को अधिक से अधिक समझाने का प्रयास करें बजाय नोट्स छपाने के"
८. "सभी अध्यापक हमारी बड़ी फिक्र करते हैं कि हमारा क्या होगा। इसीलिए वे अपना १०० प्रतिशत देने में चूक जाते हैं। हम हर किसी को ये नहीं कह सकते कि वो ठीक से नहीं पढ़ाते क्योंकि उन्हें जो नहीं आता उसे वो पढ़ाते ही नहीं और हम शिकायत भी नहीं कर पाते.."
९. अध्यापक जो हमें कुछ सिखाना चाहें, जो अपने ज्ञान को बराबर से सभी में बांटना चाहें जो किसी भी समस्या में पूरा सहयोग दें। पर यहां पर ऐसे कुछ ही अध्यापक मिले जो विद्यार्थी के साथ पूरा सहयोग दिये"
१०. "कुछ एक अध्यापकों ने बहुत अच्छा ही दिशा निर्देश दिया और पढ़ाया परन्तु कुछ अध्यापकों ने पढ़ाने में कोई रुचि नहीं ली......."
११. "...... मेरा ये नजरिया है कि कोई भी अध्यापक अपने विद्यार्थी को अच्छा बनाने का प्रयास करते हैं। हमें करना अपने आप से ही सब कुछ है। सिर्फ अध्यापकों का एकमात्र सहयोग ही चाहिए जो शायद अपनी व्यस्तता के कारण हमें कम दे पाते हैं......"
१२. "कुछ टीचर तो अपना पूरा ज्ञान स्टूडेन्ट को देना चाहते हैं पर कुछ तो केवल बोर्ड पर ही टापिक लिखकर कोर्स खत्म करना चाहते हैं चाहे स्टूडेन्ट को समझ में आये या न आये"
१३. "छात्रों से चाहते हैं १०० प्रतिशत खुद कितने प्रतिशत हैं यह उनको पता नहीं"
१४. ".... सभी अध्यापक बहुत अच्छे हैं, ....... विद्यार्थियों को समझते हैं और उन्हें सही ज्ञान देते हैं। और उनके लिए कड़ी मेहनत करते हैं।"

1 Comment:

K M Mishra said...
This comment has been removed by a blog administrator.

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